प्यासी मकान मालकिन के साथ चुदाई का सुख

(Pyasi Makan Malkin Ke Sath Chudayi Ka Sukh)

हाय दोस्तों, मैं अभय, जनपद गाजीपुर का मूल निवासी हूँ। मेरी उम्र करीब 29 वर्ष है। मैं औसत शरीर का, दिखने में स्मार्ट बंदा हूँ। और मैं मिर्जापुर में सरकारी नौकरी करता हूँ।

दोस्तों, ये कहानी मेरी जिंदगी का वो हिस्सा है जो मैं कभी भूल नहीं सकता। मिर्जापुर में नौकरी लगने के बाद मुझे रहने की जगह ढूंढनी पड़ी। शहर में कई जगह देखी, लेकिन एक पुराना सा मकान मिला जो मकान मालिक ने किराये पर दिया था।

मालिक का नाम रमेश चंद्र था, जो दिल्ली में बिजनेस करता था। महीनों से घर नहीं आया था। घर की मालकिन, सबिता भाभी, अकेली रहती थीं। सबिता भाभी की उम्र करीब 32 साल थी, लेकिन दिखने में 28 की लगतीं। गोरी चिट्टी, लंबे काले बाल।

चूचियां भरी हुईं, कमर पतली। साड़ी पहनतीं तो बदन से चिपक जाती, नाभि दिख जाती। मैंने पहली बार उन्हें देखा तो मन ही मन सोचा, ‘वाह, क्या माल है। अगर मौका मिला तो चोद डालूंगा।’

मैंने ऊपरी मंजिल पर कमरा लिया। नीचे उनका कमरा था। रसोई शेयर करते थे। सुबह-शाम भोजन का इंतजाम हो जाता था। सबिता भाभी बहुत अच्छी थीं, लेकिन आंखों में उदासी झलकती। मालिक महीनों से दूर, कोई बच्चा भी नहीं। मैंने सोचा, शायद प्यासी होंगी।

पहले हफ्ते में मैंने उन्हें ज्यादा नोटिस नहीं किया। नौकरी पर जाता, शाम को लौटता। लेकिन एक शाम, बारिश हो रही थी। मैं देर से लौटा, भीगा हुआ। भाभी ने चाय दी। ‘अभय जी, इतनी देर कैसे?’ उन्होंने पूछा। मैंने कहा, ‘ऑफिस में काम ज्यादा।’ उनकी साड़ी गीली हो गई थी मेरे पानी से। ब्लाउज से चूचियां झांक रही थीं। निप्पल्स सख्त। मेरा लंड हिल गया।

रात को सोया, लेकिन नींद न आई। दिमाग में भाभी घूम रही। कल्पना करने लगा, उनकी चूत चाटते हुए। मेरा 6.5 इंच का लंड खड़ा हो गया। उनका नाम लेते हुए हस्तमैथुन किया। ‘सबिता… तेरी चूत चोदूंगा…’ अगले दिन सुबह, मैंने उन्हें रसोई में देखा। साड़ी कमर पर बंधी, पेट दिख रहा।

मैंने जानबूझकर करीब गया, हाथ छुआ। वो शर्मा गईं, लेकिन मुस्कुराईं। ‘ मैंने कहा भाभी, आज नाश्ता अच्छा है। धीरे-धीरे बातें बढ़ीं। शाम को वे मेरे कमरे में कुछ सामान देने आईं, दरवाजा खुला छोड़ दिया। मैंने नोटिस किया, उनके हाथो की चूड़ियां खनक रही।

एक हफ्ता बीत गया। मालिक का फोन आया भाभी को, लेकिन छोटी बात। वे उदास हो गईं। रात को मैं सिगरेट पीने छत पर गया। नीचे उनका कमरा, खिड़की से रोशनी आ रही। जासूसी का मन हुआ। चुपके से झांका। भाभी अंदर, साड़ी उतार रही। ब्लाउज खोला, ब्रा में चूचियां उफान मार रही।

फिर ब्रा भी उतारी। भूरे निप्पल्स, बड़े-बड़े। हाथ से दबाईं। फिर पेटीकोट खोला, पैंटी में हाथ डाला। सिसकी भर रही, ‘उफ्फ… कितनी प्यास लगी है…’ मेरा लंड तन गया। लेकिन ये तो शुरुआत थी।

अगली रात, मैं फिर झांका। इस बार भाभी पूरी नंगी। बेड पर लेटी, एक डिल्डो निकाला। काला रबर का, मोटा। चूत पर रगड़ा। गीली हो गई चूत। बाल साफ, गुलाबी भोसड़ी। डिल्डो को मुंह में लिया, चाटा। फिर चूत में धीरे-धीरे डाला। ‘आह… रमेश… चोदो मुझे…’ लेकिन मालिक तो दूर थे।

वो जोर-जोर से डिल्डो अंदर-बाहर करने लगी। चूचियां उछल रही। कमर तान ली। ‘ओह्ह… हां… गहरा… चूत फाड़ दो…’ मैंने पैंट खोली, लंड पकड़ा। मुठ मारने लगा। भाभी की चीखें सुनकर झड़ गया। दीवार पर माल गिरा दिया।

अब रोज रात को झांकना शुरू। भाभी की चुदाई के सीन देखता। कभी उंगलियां डालती, कभी डिल्डो। एक बार गांड में भी ट्राई किया। लेकिन अधूरा रह जाता। मैं सोचता, ‘भाभी, मैं हूं ना। मेरा लंड ले लो।’ एक दिन मौका मिला। मालिक ने कहा, दो महीने बाद आएगा। भाभी रो रही। मैंने कंधा दिया।

‘भाभी, सब ठीक हो जाएगा।’ रात को वे मेरे कमरे में आईं। ‘अभय जी, नींद न आ रही। बात कर लें?’ मैंने हां कहा। चाय बनाई। बातों-बातों में बोलीं, ‘रमेश कभी फोन भी नहीं करता। अकेलापन सहना पड़ता है।’ मैंने हाथ पकड़ा, ‘भाभी, आप अकेली नहीं। मैं हूं।’ वो शर्मा गईं।

धीरे-धीरे करीब आ गए। अगले दिन शाम, मैं नहा रहा था। दरवाजा खुला। भाभी आईं। मुझे नंगा देखा। मेरा लंड आधा खड़ा हो गया। ‘ओह सॉरी…’ लेकिन आंखें टिक गईं। मैंने तौलिया लपेटा। ‘भाभी, कोई बात नहीं।’ रात को फिर झांका। भाभी डिल्डो ले रही, लेकिन नाम मेरा ले रही थी।

‘अभय… तेरी चूत चोद… नहीं, तू चोद मुझे…’ मैं चौंका। कल्पना कर रही मेरी। अब हिम्मत हुई, अगली सुबह, रसोई में अकेले। मैंने पीछे से गले लगाया। ‘भाभी, मैं जानता हूं आपकी प्यास को।’ वो कांपीं, ‘क्या कह रहे हो?’ मैंने हाथ चूचियों पर रखा। दबाया। ‘रोज देखता हूं आपको। डिल्डो से मजा नहीं आएगा। मेरा लंड लो।’

भाभी मुड़ीं, आंखों में आंसू थे लेकिन चमक भी। ‘अभय, ये गलत है। लेकिन… हां, प्यास बुझा दो।’ मैंने उन्हें किस किया। होंठ चूसे। हाथ साड़ी में डाला ब्लाउज खोला, ब्रा ऊपर की, चूचियां बाहर। जोर-जोर से निप्पल्स चूसे, भाभी सिसकीं,

‘आह… अभय… कितने दिन से इंतजार…’ मैंने साड़ी उतारी, पेटीकोट खोला, पैंटी गीली, चूत में उंगली डाली। ‘भाभी, कितनी गीली हो।’ वो बोलीं, ‘चोदो जल्दी।’

मैंने उन्हें बेड पर लिटाया। पैंटी उतारी, चूत चाटने लगा। जीभ क्लिट पर, उंगलियां अंदर-बाहर। भाभी की टांगें फैलाईं। ‘ओह्ह… अभय… जीभ कमाल… चूसो चूत…’ मैंने चूसा। रस चखा। फिर मोटा, सख्त लंड निकाला। भाभी ने पकड़ा, ‘इतना बड़ा। रमेश से दोगुना।’ मुंह में लिया। चूसा। जीभ घुमाई, मैंने सिर पकड़ा, गले में धक्का दिया।

‘हम्म… चूसो भाभी…’ 5 मिनट ब्लोजॉब किया। लंड चूत पर रगड़ा। एक धक्का, आधा अंदर। भाभी चीखी, ‘आह! धीरे…’ पूरा घुसेड़ा। चाप-चाप आवाज आने लगी, कमर पकड़कर ठोका। ‘भाभी… तेरी प्यासी चूत… मेरा लंड ले रही…’ वो बोलीं, ‘हां अभय… चोदो जोर से… फाड़ दो भोसड़ी…’

20 मिनट पेला, भाभी के पैर कंधों पर रखे और गहरा घुसाया। चूचियां दबाईं। निप्पल्स काटे। वो तड़पी, ‘ओह्ह… आ रहा है… ऑर्गेज्म…’ मैंने स्पीड बढ़ाई। झड़ गया भाभी भी कांपी। हम हांफे। ‘अभय, कमाल था। डिल्डो से बेहतर।’ मैंने कहा, ‘रोज चोदूंगा।’

अब रोज का सिलसिला। सुबह उठते ही, रसोई में। भाभी झुकती, मैं पीछे से डॉगी स्टाइल मे लंड घुसाता। गांड पकड़कर ठोकता। ‘भाभी… तेरी गांड कितनी रसीली…’ चूत में धक्के मरता। कभी मुंह में माल छोड़ता। शाम को नहाते समय। बाथरूम में घुस जाता। नंगा होकर चोदता। खड़े होकर, कमर में पैर लपेटे। पानी बहता, चूत फिसलती। ‘आह… अभय… नहाते हुए चुदाई… मजा आया…’

एक दिन ऑफिस से जल्दी लौटा। भाभी घर पर। मैं चुपके से अंदर। उनका कमरा खुला था डिल्डो ले रही थी। लेकिन रुक गयी, ‘अभय, आ गए?’ मैं हंसा, ‘हां, लेकिन अब डिल्डो नहीं, असली लंड दो।’ लंड निकाला। भाभी घुटनों पर बैठ कर लंड चूसने लगी, लंड गले तक लिया।

फिर बेड पर मैंने पैर फैलाए चूत चाटी फिर 69 पोजिशन मैं चूत चूसता, वो लंड चूसती। ‘हम्म… भाभी… तेरी जीभ…’

भाभी बोलीं, ‘अभय, गांड भी मार लो। डिल्डो से ट्राई किया, लेकिन दर्द हुआ।’ मैंने थूक लगाया। उंगली डाली ढीली की फिर लंड का सिरा। धीरे घुसाया।

‘आह! दर्द…’ लेकिन सह गईं। पूरा अंदर ठोका धीरे-धीरे। ‘भाभी… तेरी गांड वर्जिन जैसी…’ स्पीड बढ़ाई। भाभी चिल्लाई, ‘हां… दोनों छेद भर दो… चोदो…’ माल गांड में छोड़ा। बाहर निकला, सफेद माल टपक रहा था।

हमारी चुदाई बढ़ती गई। कभी छत पर रात को। तारों के नीचे नंगे हुए। भाभी ऊपर चढ़ी, उछलने लगी। ‘अभय… रात की चुदाई… रोमांचक थी…’ कभी किचन में। टेबल पर लिटाया। पैर ऊपर। चोदा। कभी लिविंग रूम में। सोफे पर डॉगी। गांड ठोकता भाभी की चीखें निकल जाती। ‘फाड़ दो… साली की तरह चोदो…’

मालिक का फोन आया। ‘जल्द आ रहा हूं।’ लेकिन हम रुके नहीं। एक दिन रिस्क लिया। मालिक आने से पहले पूरे घर में आखिरी चुदाई की। पहले बेडरूम में चूत चोदी। फिर बाथरूम में गांड मारी। फिर किचन में मुंह में डाला । भाभी थक गई। तीनों छेद भर दिए।भाभी बोली ‘अभय, तू मेरा पति बन गया।’

कुछ दिनों बाद मालिक आया, लेकिन भाभी चुप रही।

ये थी मेरी माकन मालिकिन भाभी की चुदाई की दास्तान उम्मीद करता हु दोस्तों आपको बहुत पसंद आयी होगी। मैं आपके लिए ऐसी रस भी चुदाई की कहानी लाता रहूंगा………….

धान्यबाद!!