मेरा नाम कार्तिक है। उम्र 36 साल। शादी को आठ साल हो चुके हैं। एक प्यारा सा बेटा है, जो अब स्कूल जाता है। जिंदगी बाहर से सेट लगती है—अच्छी जॉब, अपना घर, फैमिली। लेकिन अंदर से? वो तो बस एक अधूरी आग की तरह सुलग रही थी।
मेरी बीवी, रीता, एक परफेक्ट हाउसवाइफ है। घर साफ रखती है, खाना बनाती है, बच्चे की देखभाल करती है। लेकिन जब बात बेडरूम की आती है, तो सब खत्म।
वो सेक्स को ड्यूटी की तरह देखती है। महीने में ज्यादातर दिन बहाने बन जाते हैं—सिरदर्द, थकान, मूड नहीं। माहवारी के पाँच दिन तो अलग। बाकी के दिनों में भी, अगर मैं जोर दूँ तो मान जाती है, लेकिन जैसे कोई लाश हो। कोई उत्साह नहीं, कोई पैशन नहीं।
मैं अंदर घुसता हूँ, कुछ मिनटों में खत्म, और वो पलटकर सो जाती है। मैं? रातें पोर्न वीडियो देखकर हाथ चलाता, कल्पना करता किसी हॉट औरत की। वो कुंठा बढ़ती गई, जैसे कोई तूफान बन रहा हो।
फिर आई प्रिया की एंट्री। प्रिया मेरी साली है, रीता की छोटी बहन। हमारी शादी के ठीक एक साल बाद उसकी शादी हो गई राज से। राज एक बिजनेसमैन है, फैमिली अमीर, सब कुछ परफेक्ट लगता था।
प्रिया की उम्र तब 27 के आसपास थी, अब 30 हो गई। उसका फिगर? वाह! 32-28-34, सही जगहों पर कर्व्स। लंबे काले बाल जो कमर तक लहराते, भरी हुई गुलाबी होंठ, आँखें जो मासूमियत और छिपी वासना का मिश्रण लिए रहतीं।
चेहरा गोल, त्वचा गोरी चमकदार। वो हमेशा सलवार-कमीज पहनती, जो उसके बॉडी को और आकर्षक बनाती। जीजा-साली का रिश्ता तो हमेशा थोड़ा खुला होता है—मजाक, छेड़छाड़, लेकिन हमारा रिश्ता बिल्कुल कैजुअल था।
मिलते तो बस हाय-हैलो, हल्की बातें। शादियों या फैमिली फंक्शन्स में देखते, मुस्कुराते, लेकिन कभी गहरी बात नहीं। मुझे कभी शक भी नहीं हुआ कि उसके जीवन में कुछ गड़बड़ है।
सब कुछ एक साल पहले बदला, जब एक फैमिली वेडिंग में हम मिले। भीड़ में वो मुझे कोने में ले गई। उसकी आँखें नम, आवाज काँप रही। ‘जीजा जी, एक बात कहूँ?’ मैंने हामी भरी। फिर वो फूट पड़ी। ‘मैं… मैं अभी भी कुंवारी हूँ।
शादी को तीन साल हो गए, लेकिन राज… वो…’ वो रुक गई, शर्म से सिर झुका लिया। मैं स्तब्ध। ‘क्या मतलब?’ मैंने पूछा। फिर उसने सब बता दिया। राज नपुंसक था।
उसका लंड छोटा सा, तीन इंच का, ज्यादातर लटकता रहता। वो कोशिश करता, लेकिन सख्त ही नहीं होता। प्रिया चूसती, जीभ से चाटती, हाथ से सहलाती, लेकिन राज मिनट भर में झड़ जाता—मुँह में, या पेट पर। कभी चूत के पास भी नहीं पहुँच पाता।
कोई घर्षण नहीं, कोई पैठ नहीं। प्रिया की चूत कभी छुई नहीं गई, कुंवारी ही रही। फैमिली वाले बच्चे के लिए दबाव डालते, डॉक्टरों के पास ले जाते, लेकिन कुछ फायदा नहीं। प्रिया अंदर से टूट रही थी, उसकी बॉडी भूखी, कुंठा में जल रही।
उस दिन से प्रिया मेरे दिमाग में बस गई। शादियों या विजिट्स में मिलती, तो बस कल्पना करता—उसे मेरे नीचे, टाँगें फैलाए, मेरे लंड की भीख मांगती। मेरा लंड कोई पॉर्नस्टार वाला नहीं, लेकिन सात इंच लंबा, दो-ढाई इंच मोटा, और इस्तेमाल करना आता है।
मैं चूत चाटना पसंद करता हूँ, जीभ से चूस-चूसकर चीखने पर मजा आता है, फिर गांड मारना। प्रिया मेरी जुनून बन गई, दिन-रात।
पिछले हफ्ते राज और प्रिया शहर में हमरे पास आए। तीन साल शादी के, प्रिया की आँखों में तनाव साफ दिख रहा था। दिन भर कैजुअल बातें—जॉब, बच्चे। बीवी ने डिनर बनाया, शाम को राज और मैंने व्हिस्की की बॉटल खोली। दो-दो 60ml पेग, जोरदार।
राज को पीना अच्छा लगता, लेकिन उसे पता नहीं था क्या होने वाला है। डिनर के बाद बीवी और बेटा सो गए। मैंने प्रिया से कहा, ‘आ जा, एक पेग तो बना ले।’ वो हिचकिचाई, राज की तरफ देखा, लेकिन आँखों में शरारत चमकी। उसने दो छोटे 30ml शॉट्स लिए, धीरे-धीरे सिप किए। राज ने तीन फुल पेग मार लिए और सोफे पर सो गया, खर्राटे लेते हुए।
शराब ने मुझे गर्म कर दिया, मसल्स ढीले। प्रिया के गाल लाल, हँसी खुली। मैंने राज को गेस्ट बेड पर डाला। फिर प्रिया की तरफ मुड़ा। वो बैठी थी, आँखें चमक रही थीं, अचानक फूट-फूटकर रोने लगी, मुझे गले लगा लिया।
जीजा जी, मैं और बर्दाश्त नहीं कर सकती,’ वो मेरी छाती पर सिसक रही थी। ‘सब पूछते हैं बच्चा क्यों नहीं। राज… वो कोशिश करता है, लेकिन उसका लंड इतना छोटा, कभी सख्त नहीं होता। मैं चूसती हूँ, चाटती हूँ, लेकिन वो मुँह में झड़ जाता, कभी चूत में नहीं घुस पाता। मैं कुंवारी हूँ, तीन साल बाद भी।’
उसके शब्दों ने मेरे अंदर आग लगा दी। वो और करीब आई, उसके मुलायम चुचे मेरी छाती से दबे, साँसें गर्म गर्दन पर। मैंने उसकी पीठ सहलानी शुरू की, पतली सलवार के ऊपर से गर्मी महसूस हो रही। वो और चिपकी, कूल्हे हल्के-हल्के हिले।
मेरा लंड पैंट में फड़कने लगा, सख्त। उसकी खुशबू—चमेली और औरत की—नाक में घुस गई। आँखें मिलीं, शराब से धुंधली लेकिन भूखी। रात के 12:30 बज रहे थे, घर शांत, बस राज के खर्राटे।
मैंने उसे बेड पर ले जाकर लिटाया, राज के बगल में। दरवाजा बंद किया, लाइट डिम की। कमरा इलेक्ट्रिक सा लग रहा। चादर हटाई, उसके बगल में लेटा। दिल धड़क रहा। हाथ उसके पेट पर, सलवार के ऊपर सहलाया। साँसें तेज हुईं। उसे करीब खींचा, टाँगें लपेट लीं। वो पिघल गई, बॉडी फिट हो गई।
हिम्मत बढ़ी, हाथ सलवार की कमर में, गांड के गोले पर। वाह, कितनी सख्त और गोल। वो हल्की सिसकी, आँखें—मत रुकना। शराब और वासना ने हमें पागल कर दिया। हाथ और अंदर, पैंटी में उँगलियाँ दबाईं, गांड मसली।
लौड़े का हल्का दबाव चुत पर डाला तो उससे बर्दाश्त नहीं हुआ, पति के उठने का डर था, इसलिए मैंने उसके होंठ अपने होंठों से कसकर दबाए और एक ज़ोरदार झटका मारकर पूरा लंड उसकी चूत में पेल दिया।
उसकी तो जैसे गांड ही फट गई, आंखें बाहर आने को हुईं, चीख गले में घुट गई. मुँह बंद था तो आवाज तो नहीं निकली, लेकिन उसके आंसू बह निकले। फिर धीरे-धीरे सब नॉर्मल हुआ. चुदाई की रफ्तार तेज़ हो गई. कुछ 10-12 मिनट की ज़ोरदार रगड़ाई के बाद मैंने उसकी चूत को अपने गाढ़े वीर्य से भर दिया।
अब वह कुंवारी नहीं रही, पहली चुदाई के बाद बहुत थक भी गई थी। मैं उसे अपनी गोदी में टांग कर बाथरूम ले गया, उधर शॉवर के नीचे खड़ी करके उसकी चुत गांड को अच्छे से साफ किया। मैंने उसे भी नहलाया और खुद भी नहा लिया।
दारू का नशा कुछ कम हो गया था और उसकी चुत में दर्द बढ़ गया था. वह तो दर्द से निर्जीव सी हो गई थी। मैं उसे वापस बेड पर लाया और एक पैग बना कर उसे यह कह कर पिला दिया कि दर्द कम हो जाएगा, पी लो! उसने पैग पी लिया, मैंने उसे बिना ब्रा के सारे कपड़े पहना दिए, यह सब हो जाने के बाद मैंने घड़ी देखी तो उसमें रात के 2 बज रहे थे।
मैं उठ कर अपने कपड़े पहन कर बाहर आया और सिगरेट सुलगाने की सोचने लगा। फिर पहले बीवी के कमरे में जाकर उसे देखा तो सब ठीक था। मैं बालकनी में आया और सिगरेट फूँक कर फिर से साली के कमरे में अन्दर आ गया।
साली को देखा तो वह मुस्कुरा रही थी। मुझे आया देख कर उसने दारू की बोतल उठा कर दिखाई. मैंने बोतल को मुँह से लगाई और नीट ही गटक कर साली के मुँह से मुँह लगा कर स्वाद ठीक करने लगा.
वह भी फुसफुसा दी- एक बार और करो न जीजा जी! मैंने कहा- हां क्यों नहीं मेरी जान … मैं तो एक बार क्या … दस बार चोदने के लिए राजी हूँ! फिर वह बोली- जीजा जी सॉरी! मैंने कहा- सॉरी किस बात की!
वह बोली- पहली बार में आपको गाली दे दी थी न … उसके लिए सॉरी! कहा- साली कुतिया … तेरी गाली ने ही तो लौड़े को मजा दे दिया था! वह हंस दी।
मैं एक और राउंड के लिए तैयार हो गया था. इस बार मैंने उससे लौड़े की चुसाई और गांड की चुदाई का भी सोच लिया था.
वह सब कैसे हुआ, अगली बार लिखूँगा.
आपको जीजा साली की चुदाई वाली यह चुदाई कहानी कैसी लगी, प्लीज जरूर बताएं.