ससुर जी की देसी चुदाई का मजा लिया

(Sasur ji Ki Desi Chudayi Ka Maza Liya)

मैं शादीशुदा हूं और ये कहानी मेरी जिंदगी की वो सच्ची घटना है जो मैंने हमेशा अपने दिल में छिपाकर रखी। कभी किसी से शेयर करने की हिम्मत नहीं हुई। आज से दो साल पहले की बात है जब मैं नई-नई ससुराल आई थी।

मेरा नाम रिया है। मैं एक छोटे से शहर से हूं जहां मेरी शादी एक अच्छे लड़के से हुई थी। उसका नाम राहुल था। राहुल एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर था और जॉब के सिलसिले में दूसरे शहर में रहता था। शादी के बाद मुझे ससुराल आना पड़ा जहां राहुल के माता-पिता रहते थे।

ससुराल एक गांव के पास का छोटा सा शहर था। वहां का माहौल बिल्कुल अलग था। मेरी सास बहुत सख्त स्वभाव की थीं लेकिन ससुर जी बहुत मिलनसार और शांत इंसान लगते थे। उनका नाम हरि प्रसाद था।

उम्र करीब 55 साल की थी लेकिन शरीर में ताकत ऐसी थी जैसे कोई जवान आदमी हो। लंबे कद काठी के थे और हमेशा मुस्कुराते रहते थे।

शादी के बाद राहुल मुझे ससुराल छोड़कर अपनी जॉब पर चले गए। मैं अकेली रह गई ससुराल में। सास जी घर का सारा काम संभालती थीं और मुझे भी सिखाती रहती थीं। लेकिन ससुर जी बाहर खेतों पर काम करते थे।

शाम को लौटते तो थके हुए लेकिन खुश नजर आते। मैं नई बहू थी तो सब कुछ नया लगता था। लेकिन धीरे-धीरे मुझे ससुर जी की नजरें महसूस होने लगीं। वो कभी-कभी मेरी तरफ ऐसे देखते जैसे कोई राज छिपा हो। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मेरी जिंदगी में ऐसा मोड़ आएगा।

पहले कुछ दिन तो सब ठीक चला। मैं सुबह उठकर घर का काम करती चाय बनाती। ससुर जी को चाय देते समय उनकी आंखें मेरी कमर पर टिक जातीं। मैं साड़ी पहनती थी और नई बहू होने के कारण थोड़ा सजती भी। एक दिन शाम को सास जी मायके गईं।

वो दो-तीन दिन बाद लौटने वाली थीं। घर में सिर्फ मैं और ससुर जी थे। रात का खाना बनाकर मैंने परोसा। ससुर जी ने कहा ‘रिया बेटी खाना बहुत अच्छा बना है। तू तो कमाल की है।’ मैंने शरमाते हुए कहा ‘ससुर जी आपकी तारीफ के लिए धन्यवाद।

खाना खाते हुए वो बोले ‘राहुल को तो तू बहुत याद आ रही होगी। लेकिन यहां तू सुरक्षित है। मैं हूं ना।’ उनकी बात में कुछ अजीब सा था लेकिन मैंने अनदेखा कर दिया।

रात को सोने का समय हो गया। मैं अपने कमरे में चली गई। लेकिन नींद नहीं आ रही थी। बाहर से ससुर जी की खांसने की आवाज आई। मैं उठी और पानी का गिलास लेकर उनके कमरे के पास गई। दरवाजा खुला था। अंदर ससुर जी बिस्तर पर लेटे थे।

उनकी धोती ऊपर सरक गई थी और मैंने देखा… ओह गॉड! उनका लंड… वो विशालकाय था। इतना बड़ा और मोटा कि मेरी आंखें फटी की फटी रह गईं। वो आधा खड़ा हो रहा था। ससुर जी ने मुझे देखा और जल्दी से धोती ठीक की। ‘रिया क्या हुआ? पानी क्यों लाई?’ उन्होंने पूछा।

मैं हकलाते हुए बोली ‘ससुर जी आपकी खांसी सुनकर… पानी सोचा…’ वो मुस्कुराए ‘चल अंदर आ।’ मैं अंदर गई और गिलास दे दिया। लेकिन मेरी नजरें बार-बार उनके लंड की तरफ जा रही थीं। वो इतना बड़ा था जितना मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। राहुल का तो उसके सामने कुछ भी नहीं था।

ससुर जी ने पानी पिया और बोले ‘रिया तू परेशान लग रही है। क्या बात है?’ मैंने सिर झुका लिया। अंदर ही अंदर एक अजीब सी उत्तेजना हो रही थी। ‘कुछ नहीं ससुर जी। बस नींद नहीं आ रही।

उन्होंने हाथ बढ़ाया और मेरी कमर पर रख दिया। ‘बैठ ना। बातें करते हैं।’ मैं बैठ गई। उनकी उंगलियां मेरी साड़ी पर सरक रही थीं। ‘तू बहुत सुंदर है रिया। राहुल खुशकिस्मत है।’ मैं शर्मा गई।

लेकिन उनकी नजरें मेरी छाती पर थीं। मेरे ब्लाउज में दूध भरी छातियां तनाव से खड़ी हो रही थीं। ससुर जी ने धीरे से कहा ‘रिया तुझे डर लग रहा है?’ मैंने ना में सिर हिलाया। लेकिन दिल की धड़कन तेज थी।

अचानक उन्होंने मुझे अपनी ओर खींच लिया। उनका हाथ मेरी जांघ पर था। ‘ससुर जी ये क्या…’ मैं बोली लेकिन आवाज कांप रही थी। ‘शशश… चुप। मैं तुझे कुछ दिखाता हूं।’ उन्होंने अपनी धोती खींच ली। अब उनका विशाल लंड पूरी तरह खड़ा था।

कम से कम 10 इंच लंबा और मोटाई ऐसी कि मेरा हाथ भी ना घेरे। सिरा लाल और चमकदार। नसें फूली हुईं। मैं स्तब्ध रह गई। ‘ससुर जी… ये…’ ‘छू ना रिया। ये तेरा है आज।’ उन्होंने कहा। मैंने हिचकिचाते हुए हाथ बढ़ाया।

जैसे ही छुआ एक करंट सा लगा। इतना गर्म और सख्त। मैंने सहलाना शुरू किया। ससुर जी की सांसें तेज हो गईं। ‘हां रिया… ऐसे ही।’

मैंने अपना हाथ ऊपर-नीचे करने लगी। उनका लंड मेरे हाथ में फड़फड़ा रहा था। ‘रिया तू कितनी नरम है। आ जा मेरे पास।’ उन्होंने मुझे बुलाया। मैं उनके बिस्तर पर चढ़ गई। वो मेरी साड़ी खींचने लगे। ‘ससुर जी… सास जी को पता चलेगा तो…’ ‘चुप। वो नहीं आएंगी।

आज रात तेरी है।’ उन्होंने मेरी साड़ी उतार दी। अब मैं ब्लाउज और पेटीकोट में थी। उनका हाथ मेरी छातियों पर आ गया। उन्होंने ब्लाउज खोला और ब्रा हटा दी। मेरी गोल छातियां बाहर आ गईं। निप्पल्स सख्त हो चुके थे। ससुर जी ने एक को मुंह में ले लिया। चूसने लगे। ‘आह… ससुर जी…’ मैं सिसकारी भरने लगी।

उनका मुंह मेरी छाती पर घूम रहा था। एक हाथ नीचे पेटीकोट में घुस गया। मेरी चूत पर उंगलियां। मैं गीली हो चुकी थी। ‘रिया तेरी चूत कितनी रसीली है।’ उन्होंने कहा। पेटीकोट ऊपर किया और पैंटी उतार दी। अब मैं नंगी थी। उनका विशाल लंड मेरी जांघों से रगड़ रहा था।

‘ससुर जी… डर लग रहा है। इतना बड़ा…’ ‘डरो मत। मैं धीरे से डालूंगा।’ उन्होंने मुझे लिटा दिया। मेरी टांगें फैलाईं। उनका लंड मेरी चूत पर रगड़ने लगा। सिरा अंदर घुसा। दर्द हुआ लेकिन उत्तेजना ज्यादा। ‘आह… ससुर जी…’ ‘हां रिया… ले ले।’

धीरे-धीरे वो अंदर धकेलने लगे। आधा लंड अंदर आ गया। मैं चिल्लाई लेकिन उन्होंने मुंह बंद कर दिया। ‘चुप… मजा ले।’

फिर पूरा लंड अंदर। मेरी चूत फटने लगी। लेकिन दर्द के बाद आनंद। वो धीरे-धीरे चोदने लगे। ‘रिया… तेरी चूत कितनी टाइट है।’ ‘ससुर जी… तेज… आह…’ मैं बोली। वो तेज चोदने लगे। उनका विशाल लंड मेरी चूत को चीर रहा था।

ठप्प… ठप्प… आवाजें आने लगीं। मेरी छातियां उछल रही थीं। ससुर जी ने एक को पकड़ लिया। चूसते हुए चोद रहे थे। मैं उनके कंधों पर नाखून चला रही थी। ‘हां ससुर जी… चोदो मुझे… आह…’ ‘रिया… तू रंडी है मेरी।’ उन्होंने कहा। मैं शर्मा गई लेकिन मजा आ रहा था।

करीब 20 मिनट चुदाई चली। मैं झड़ने लगी। ‘ससुर जी… मैं… आ रही हूं…’ ‘हां… मैं भी।’ उनका लंड फूल गया। गर्म वीर्य मेरी चूत में छूटने लगा। इतना ज्यादा कि बाहर बहने लगा। हम दोनों पसीने से तर थे। ससुर जी ने मुझे गले लगा लिया। ‘रिया तू कमाल है।

ससुर जी… ये गलत था लेकिन…’ ‘कुछ नहीं गलत नहीं। ये हमारा राज है।’ रात भर हम साथ रहे। सुबह हो गई तो मैं चुपके से अपने कमरे में चली गई।

अगले दिन सास जी लौट आईं। लेकिन अब मेरी जिंदगी बदल चुकी थी। ससुर जी की नजरें अब खुलकर मेरी तरफ होतीं। शाम को जब सास जी मंदिर जातीं तो वो मुझे बुला लेते। ‘रिया आ जा।’ एक दिन रसोई में ही उन्होंने मुझे पकड़ लिया।

साड़ी ऊपर की और पीछे से लंड अंदर डाल दिया। ‘आह ससुर जी… यहां?’ ‘हां… चुप।’ तेजी से चोदा। मेरी चूत फिर गीली हो गई। उनका विशाल लंड हर बार मुझे पागल कर देता।

धीरे-धीरे ये सिलसिला चलने लगा। राहुल फोन पर पूछते ‘कैसा है सब?’ मैं कहती ‘ठीक है।’ लेकिन अंदर से ससुर जी का लंड मेरे दिमाग में घूमता। एक रात सास जी सो गईं। ससुर जी मेरे कमरे में आ गए। ‘रिया आज पूरी रात।’ उन्होंने दरवाजा बंद किया।

मुझे नंगा कर दिया। उनका लंड मुंह के पास लाए। ‘चूस रिया।’ मैंने पहली बार ब्लोजॉब दिया। मुंह में लिया लेकिन आधा ही गया। चूसने लगी। ससुर जी के हाथ मेरे बालों में। ‘हां… अच्छा… गहरा ले।’ मैं कोशिश की। लार टपक रही थी।

फिर उन्होंने मुझे डॉगी स्टाइल में किया। पीछे से चोदा। उनका लंड मेरी गांड तक लग रहा था। ‘आह… ससुर जी… मार डालोगे।’ ‘नहीं… मजा दे रहा हूं।’

चुदाई के दौरान वो कहते ‘रिया तू मेरी रखैल है। राहुल को मत बताना।’ मैं कहती ‘नहीं बताऊंगी। आपका लंड मेरा है।’ उनका वीर्य हमेशा मेरी चूत में। कभी मुंह में। कभी छातियों पर। ससुराल में दो महीने रहने के बाद राहुल आया।

लेकिन तब तक ससुर जी ने मुझे 20-25 बार चोदा था। हर बार नया मजा। एक दिन बाथरूम में। पानी के नीचे। उनका लंड मेरी चूत में। ‘ससुर जी… फिसल रहा है।’ ‘पकड़ ले।’ चोदते हुए।

राहुल के आने पर सब रुक गया। लेकिन राहुल के जाने के बाद फिर शुरू। सास जी को शक नहीं हुआ। मैं प्रेग्नेंट हो गई। पता चला तो सब खुश। लेकिन अंदर से कि बच्चा ससुर जी का है। उनका विशाल लंड ने मुझे ये दिया।

आज भी वो राज छिपा है। लेकिन यादें ताजा हैं। ससुर जी का वो विशाल लंड… मेरी जिंदगी बदल गया।